न कही मंदिर में मिला न कही मस्जिद में मिला, इंसान था दुनिया की महफिल में मिला, ग़मज़दा छोड़कर मुझको सब मसरूफ थे कही, वही इक शख्श था जो मुझको हर मुश्किल में मिला।
Pradyumna yadav
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