तोड़ दे तोड़ दे हर बंधन को अब तोड़ दे,
लबों को तू आज़ाद कर, खामोशियो को छोड़ दे।
नयी दिशा , नयी फिजा,
बुलाती है अब आ भी जा,
घरों में क्यों है बैठा तू,
अब बैठना तो छोड़ दे
तोड़ दे तोड़ दे...
खुद पे रख भरोसा ,
हुआ जो उसको भूल जा,
यही है मौका आखिरी,
न इसको अब तू छोड़ दे,
तोड दे तोड़ दे...
ज़िल्लातो का दौर था,
आज वो ख़त्म हुआ,
खुशियों को तू ओढ़ ले,
गम का साया छोड़ दे.
तोड़ दे तोड़ दे....
लिखेंगे नयी दास्ताँ ,
सुन ले तू ओ हुक्मरां,
तेरा समय ख़त्म हुआ,
तू अपनी कुर्सी छोड़ दे,
तोड़ दे तोड़ दे ....
pradyumna Yadav
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