Sunday, May 19, 2013

एक सन्देश ..मुर्दा लोगो के नाम ।

हम खुश है, हमारा पेट भरा हुआ है, जीवन मस्ती में बीत रहा है तो हमे लगता है की बस्स्स!!! दुनिया में सभी सुखी हैं , आनंद में हैं। जरा चकाचौंध से बाहर निकलिए, अपने दायरे को बढ़ाईये! आसपास के वातावरण को देखिये! आपको क्षद्म खुशहाली और विकास के पीछे भयंकर शोषण और अत्याचार नज़र आएगा। समाज में कही महिलाओ, बच्चो, बुढो का शोषण हो रहा है तो कही मुसलमानों, दलितों , आदिवासिओ का। घर से लेकर दफ्तर , गली से लेकर चौराहे, आचार से लेकर विचार ...सब दूषित नज़र आयेंगे!! आप इस गन्दगी में रह रहे हैं। आपको कोई परवाह नहीं है। क्या आप कीचड़ में लोटने वाले सुवर से किसी मायने में कम हैं?? क्या आप भी उसी की तरह गन्दगी में रह कर उसका आनंद उठाने लगे हैं?? सुबह उठते ही चाय काफी या सिगरेट पी कर या फिर मुह में तम्बाकू ठूस कर लैट्रिन में हगना, नास्ता कर के आफिस जाना, लंच करना, आफिस में पंचायत करना , आते जाते वक़्त रोड पर कमसिन लडकियो को घूरना, शाम को दारू या बियर पीना , रात में पत्नी के साथ सेक्स कर के सो जाना ...ये कोई जिंदगी है। क्या हमारी समाज के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं हैं। क्या हम बस ऐसे ही कीड़े-मकोड़ो की तरह जी कर मर जाने के लिए बने हैं???
मुझे आश्चर्य है लोग युवा पीढ़ी से परिवर्तन की उम्मीद करते हैं। वो युवा पीढ़ी जो सिनेमा, क्रिकेट, नशा, सेक्स , अपराध आदि में दिन-ब-दिन लिप्त होती जा रही है। जो कुछ परिवर्तन करने के इक्षुक भी है उन्हें हमारी वर्तमान व्यवस्था ने रोजी-रोटी और पेट पालने के जुगाड़ तक सिमित कर रखा है। बचे-खुचे युवक पढ़-लिख कर इस शोषणकारी व्यवस्था का ही हिस्सा बन रहे है और भ्रष्टाचार तथा शोषण को बढ़ावा दे रहे है। हमारे यहाँ देश को आगे ले जाने के लिए केवल तालियाँ पीटने वाले हिजड़ो की फ़ौज तैयार हो रही है।
क्या हम इनके दम पर देश की दशा सुधारेंगे?? क्या हम इनकी बदौलत देश का विकास करेंगे। ?/ जवाब है ...नहीं!!! अब आपको आदत पड़ गयी है नाकारेपन की । अब आप केवल खामोशी से तमाशा देख सकते है।
और मै जानता हूँ की ये पढने के बाद आपकी ख़ामोशी टूटेगी। आपके हाथो में खुजली होने लगेगी , आपकी जुबान फड़फाड़ने लगेगी। शायद मैंने आपकी दुखती रग पर हाथ रख दिया है। मै जानता हूँ आप आपने गिरेबान में झांके बिना मुझ पर उंगलियाँ उठाएंगे। लेकिन आप कितनो का मुह बंद करेंगे! मेरी जगह कल और भी बहुत से लोग आयेंगे। कितनो का मुह बंद करेंगे आप??? यकीन जानिए आपकी आने वाली पीढ़िया जिस दिन जागरूक होंगी आपको धिक्कारेंगी।आप कभी गर्व के साथ उनका सामना नहीं कर पाएंगे। थू है आप पर!!!

No comments:

Post a Comment