Sunday, May 19, 2013

जीवन के पथ पर ओ राही ...

ये क्या की इक ठोकर में ही रुक कर के घबराते हो,
बिना रण मे पाँव धरे ही पीछे को हट जाते हो,
अभी शौर्य गाथाए लिख कर तुम्हे इतिहास बदलना है,
जीवन के पथ पर ओ राही तुमको मीलो चलना है।
माना की तन क्षीण हुआ है, मन में दुविधा भर आई है
पर क्या बोलो धरा कभी रुक कर के यूँ सुस्ताई है,
कंधो पर ले भार तुम्हे अंतिम क्षण तक बस चलना है,
है,
जीवन के पथ पर ओ राही तुमको मीलो चलना है।
याद तुम्हे उन मधुर क्षणों की रह रह कर तड़पायेगी ,
तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य मार्ग से पीछे को लौटाएगी,
मगर कभी क्या रूख गंगा का गंगोत्री में बदला है,
गंगा सा अविरल तुमको नित बहते ही बह चलना है,
है,
जीवन के पथ पर ओ राही तुमको मीलो चलना है।

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