इलाहाबाद में सड़को पर आते-जाते वक़्त कोई न कोई अक्सर किसी कोचिंग वगैरा के ऐड वाला पर्चा पकड़ा देता है। अगर एक घंटे तक यूनिवर्सिटी के आसपास खड़े रहे तो आपको कम से कम 10-12 ऐसे पर्चे जरुर मिल जायेंगे । उन पर्चो से फायदा ये होता है की नए और सस्ते कोचिंग संस्थानों की जानकारी मिल जाती है। एक दूसरा सबसे बड़ा फायदा ये है की अगर आप 10 दिन तक उन पर्चो का संग्रह कर ले तो आपके पास इतना परचा इकठ्ठा हो जायेगा की आप उस पर्चे के दूसरी तरफ के बिना लिखे हुये भाग को बेहतर काम में ले सकते हैं। मसलन, आप चाहे तो उस पर कविता - कहानिया लिख सकते हैं या फिजिक्स, मैथ, कामर्स के न्यूमेरिकल साल्व कर सकते हैं या फिर चित्र वगैरा भी बना सकते हैं। आप तो करेंगे नहीं क्योकि आप तो रुपये पैसे वाले आदमी हैं। यहाँ "आप "का ताल्लुक कमजोर आर्थिक स्थिति वाले जुगाडू छात्रो से है।
उनके लिए अब इस प्रकार के जुगाड़ करना सम्भव नहीं दिख रहा है। कोचिंग वालो के दिमाग में न जाने क्या आ गया है की वो अब पर्चे के दोनों तरफ एड छापवाने लगे हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए , क्योकि इसी बहाने कम से कम कोई उनके पर्चो को लेता तो था। और सबसे बड़ी बात उसका सदुपयोग हो जाता था , उसे इज्जत मिल जाती थी। बाकि लोग तो उसे लेकर रोड पर फेक देते हैं। इससे पेपर भी वेस्ट होता है और सड़के भी गन्दी होती हैं। कोचिंग वालो को ऐसा नहीं करना चाहिए। ;-((
Tuesday, May 21, 2013
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