लडकियां,
तब कुछ ज़्यादा ही फिलोसोफिकल हो जाती हैं,
जब छोड़ने को होती हैं।
मने लोक परलोक,
जन्म पुनर्जन्म,
हम फिर मिलेंगे,
जग हँसाई,
कोख का क़र्ज़...
और बाउ जी दुहाई ।
......मनीषा हो जाती हैं एकदम ।
बाह बाह......बाह बाह....बाह बाह !!
हे फलाने...
आय हैव स्पेंट माय लाइफ्'स बेस्ट टाइम विद यू,
....और जो नए फलाने हैं न,
उनको कभी सच्चा पियार नहीं कर पाऊँगी,
मेरी आत्मा तुम्हारे पास है, फलाने !!
फलाने खुस्स रहना ज़िंगदी में,
मेरे लिए खुस्स रहना, फलाने ।
हे बाबू वाले फलाने
हे जानू वाले फलाने
तुम बहोत अच्छे हो,
देखना तुम्हे मुझसे भी अच्छी मिलेगी
मैं खोजुंगी ना !!
फलाने,
लड़कियों की जिंदगी बहुत कठिन होती है,
दू-चार साल तुम्हारे साथ रहके इस कठिनाई को टाला
(पर नए फलाने का ऑफर इत्ता सही है कि सोचती हूँ कि लड़कियों वाली कठिन ज़िन्दगी को गले लगा ही लूं),
बाबू...फलाने
अब भूल जाने में ही बेहतरी है
ईश्वर भी यही चाहता है।।
वी शुड मूव ऑन !!
बाबू...मैं कभी भूल नहीं पाऊँगी तुम्हें
मैं अपनी कोख़ (भारी शब्द) से जब
किसी को जन्म दूंगी तो उसका नाम
तुम्हारे नाम पे रखूंगी...
'फलाने' ।
और नए घर में बाप का नाम
अपने नाम के साथ जोड़ने की होगी अगर प्रथा
तो नाम हो जायेगा
'पुराने फलाने' 'नए फलाने' सिंह यादो
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साली टोनही..
नागिन,
कहाँ से लाती है रे येे सब...
और फिर इस्त्री विमर्श भी बतियाती है !!
- Abhishek Kumar Yadav की कविता , फेसबुक से साभार
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